Sunderkand PDF Download Free | सुंदरकांड पाठ हिंदी में पीडीएफ डाउनलोड

Sunderkand PDF Download Free सुंदरकांड पाठ हिंदी में अर्थ सहित PDF

सुंदरकाण्ड हिंदी में एक महाकाव्य है जो वाल्मीकि रामायण का एक अध्याय है। वाल्मीकि रामायण में सुंदरकाण्ड पवनपुत्र हनुमान की कथानक है, जिसमें हनुमान लंका जाते हैं और सीता माता को खोजने का कार्य संपादित करते हैं।

सुंदरकाण्ड के नाम से जाने जाने वाले इस अध्याय का महत्त्वपूर्ण स्थान रामायण में है। इसे रामायण के विभागों में सबसे लंबा और महत्त्वपूर्ण भी माना जाता है। सुंदरकाण्ड में हनुमान जी का वर्णन तथा उनके बड़े बड़े बलिदानों की कथानक विस्तार से बताया गया है।

सुंदरकाण्ड एक अद्वितीय काव्य है जो रामायण की महत्त्वपूर्ण घटनाओं को संक्षेप में समाहित करता है। यह अध्याय प्राचीन भारतीय साहित्य में सर्वाधिक पठित, प्रशंसित और प्रचारित काव्यों में से एक है। सुंदरकाण्ड को पढ़ने या सुनने के लिए विशेष पूजा-पाठ और व्रत विधियाँ भी मान्यता में आती हैं।

सुंदरकांड कार्यपूर्ण वर्णन

सुंदरकांड श्रीमद्वाल्मीकि रामायण का एक महत्वपूर्ण खंड है। यह खंड भगवान श्रीराम के अयोध्या निवास से सीता माता की उनकी अपहरण से पूर्व के घटनाओं का वर्णन करता है।

सुंदरकांड में राम की वानर सेना के साथ काश्यप ऋषि की आशीर्वाद से लंका यात्रा, हनुमानजी की उष्ट्र सेना से युद्ध, सीता माता के पत्रकार हनुमान तक के भ्रमण, सीता माता के साथ वनवास और राक्षसी सूर्पणखा का वध आदि घटनाएं वर्णित हैं।

इस प्रकार, सुंदरकांड की कविताएं और गाथाएं हिंदी भाषा में इसके अर्थों के साथ उपलब्ध हैं। यहां एक मात्रात्मक संक्षेप में सुंदरकांड के पाठ का अर्थ दिया गया है

  1. श्रीराम और वानर सेना की लंका यात्रा: सुंदरकांड शुरू होता है जब श्रीराम और वानर सेना वानरराज सुग्रीव के साथ लंका यात्रा करते हैं। इसमें वानर सेना ने सेतु बांधने में मदद की।
  2. हनुमानजी का लंका में भ्रमण: सुंदरकांड में हनुमानजी लंका में प्रवेश करते हैं और सी

संपूर्ण सुंदरकांड पाठ

कौशल्या सुत काश्यप अति अभिमानी। पूर्वजन प्रताप सुनि सहस बनाये॥ सिया राम लक्ष्मण प्रभु चरित्र सुहाए। जानकी दुलारी दुःख भरी दशा दिखाए॥ कहि परजा सब जानी भारति अगम सुनाये। रामचंद्र सम भयो लंका विधिवत सजाये॥ सम्पूर्ण सुंदरकांड पठि पराया। रामचंद्र परिश्रम प्रेम समाया॥

बालकाण्ड: तातब सुनि भृगुपति राम जन्म कथा। कहि कहि कलेस भये नाथ बरथा॥ अंजनि तनय सुधि लेहु प्रभुहिं। करजु रुचिर नाम तन रामहिं॥ काकभुषुण्डि खात्रि भयो ताता। राम तपस्वी तन सो जाता॥ दशरथ नन्दन दशा भर अपारी। रामहि लाभ अगम जगत उधारी॥ स्वयंवर माधु तात दीन्हें। तनय काज बिचारि सो कीन्हें॥ तात दशरथ बचन प्रमाणे। तुलसीदास बचन सम्माने॥ सब सो दीन्हें सो कहा। कपि जग मानस रहा॥ लक्ष्मण भगति नित प्रभु चितायौ। रघुपति चरित्र गुन गायौ॥ काज कठिन भगति नहिं सोहै। ग्रन्थ पढ़ि सब लोग सोहै॥ सब जग मूल न लिखिये राम चरित्र। भव तात सकल तात भयो हरित्र॥ कहहु कपि सुनहु प्रभु सब दीन्हा। प्रभु परायण जनु अपन दीन्हा॥ तुलसीदास नित रत निज जीवन। काज तात तजि रघुबिर गीतवन॥

अहल्याकांड: सोन सतरूपा निज भुज चारी। प्रभु पद बिनु न धावइ चारी॥ तात कृपा किन्हें निज दरसि दीन्हा। महदेव कृपा भयो अपरंहा॥ सो भरत सम दीन्हियें सो नाथ। मोहि प्रभु भजें जब जब आथ॥ राजा जनक नित अति उदारा। प्रभु पद प्रेम परम सारा॥ सब लोचन तजि प्रभु पद पावा। पूरन सुख नाथ तिहि बर जावा॥ आदि अनंत भगवान सोहै। साधू चरित्र गुन गावन सोहै॥ अहल्या तात कृपा बिनय नित नाता। मोहि त्रास नाथ कथा सुनाता॥

विश्वामित्राकांड: विश्वामित्र बिनय नित्त सज्जन। त्रास बिना राम कृपा नहिं काज॥ मारिच निकट कृपा धर लीन्हे। अकारण सो रामहि तजि दीन्हे॥ श्री राम रामेश्वर रण बनायौ। तातक त्रास जब जब संहायौ॥ शबरी नित्त दूत भेजिये। भगति प्रभु पद सर न लिये॥ संभरी दूत संदेस बिनय कीन्हे। सोइ सोइ कहि लव राम पठायौ॥ लक्ष्मण जब प्रभु पद लगाए। मारुतिहि मोहि तब अद्भुत भए॥

सुंदरकांड: काक बचन सुनि सीताराम। हरष हृदयं जोय सरबनारी॥ प्रभु नाम संतत धर लिये। मन आनंद प्राण पूजिये॥ संभरी दूत सीता संग बुलाए। अतुलित जादिमति बल सब गाए॥ लव गति नित गावत सर धारी। पुनि बिनय कपि दूत सम्भारी॥ पुरुषोत्तम जानकी जाती। तात संभरी परम सुनाती॥ रामचंद्र सब के काज सवारे। सीता लक्ष्मण प्राण उबारे॥ सुग्रीवदूत तब कैद सुधारे। दिये दासरथ करि वचन वारे॥ हनुमान जीवन कथा रामदूत। पठि जानकी प्राण उदारूत॥

युद्धकांड: प्रभु जानत सब हरि महि बीची। बिमुख नगर लंका निज लीची॥ उमा राम तपस्वी तनु सोहै। प्रभु दया मूल अगम सोहै॥ जम्बुक काक सब दीन्हें। मोहि त्रास नाथ अबिनासी॥ लंका सीता तात कीन्हें। बचन लगि रामहि बचाएँ॥ हरि नाम सुनि हरि अधिकारी। पूजहिं राम चरन सर सारी॥ तात कृपा तब धरि लीन्हें। राम भगति तात सुख प्रीन्हें॥ रावणाकांड: रावण बिरादि बचन सुनायौ। निज दूत करिअ सीता पठायौ॥ अहिरावण निज नाग निवारे। बालि निकट रामहि उबारे॥ समुद्र तरन दूत सब भारे। प्रभु जानत सब अनुमाने॥ रावण जेहि न जानत पाथरी। रामहि निज अवतारी॥ तात कृपा तेहि प्रताप तिहारे। संकट सब जन करहिं तारे॥

उत्तरकांड: कैकेयी पुत्र हरष होय। अगम भगवान सुख पायौ॥ सर्वेष्ट कामना सम्पूर्ण करिये। ब्रह्मा विष्णु मानु अमर जनु लिये॥ रामचंद्र चरन के जोरे। पठत जन सब सुख निधि तोरे॥ संकट भय जब जाके अनुभवा। सूख शोक सब होय दूरवा॥ तुलसी प्रेम सुख मन विचारी। सुंदरकांड प्रभु चरित्र पठारी॥ रामचंद्र जी की जय। हनुमान जी की जय॥

Sunderkand Lyrics In Hindi

Here are the lyrics of the Sunderkand in Hindi

सुंदरकांड

दोहा: श्री गुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस बिकार॥

चौपाई: जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥

रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा विराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥

शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥

विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥

लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद-शारद सहित अहीसा॥

जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबी कोबिद कहि सके कहां ते॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीहीं। राम मिलाय राज पद दीहीं॥

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥

युग सहस्त्र योजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा॥

और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै॥

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥

साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥

अंतकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई॥

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥

संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

घर पर सुंदरकांड पाठ कैसे पढ़ा जाए

सुंदरकांड, एक हिंदी काव्य के रूप में श्रीमद् वाल्मीकि रामायण का एक अंश है, जिसमें लंका दहन तक के महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताए गए हैं। सुंदरकांड में श्री हनुमानजी की महत्त्वपूर्ण भूमिका है,

जो हनुमान चालीसा के रूप में भी प्रसिद्ध है। यह पवित्र काव्य तुलसीदासजी द्वारा लिखा गया है और भगवान श्रीराम की ग्लोरी और भक्ति को व्यक्त करता है।यदि आप घर पर सुंदरकांड का पाठ करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित चरणों का पालन कर सकते हैं

  1. पवित्रता और स्नान: सुंदरकांड पाठ करने से पहले, अपने शरीर को नियमित स्नान करें और पवित्र वस्त्र पहनें। यह आपको एक पवित्र और ध्यानार्थ आवास सृजित करेगा।
  2. पूजा स्थल की स्थापना: एक पूजा स्थान का निर्माण करें जहां आप सुंदरकांड का पाठ कर सकें। इसमें एक विग्रह, एक फोटो या कोई प्रतीक श्री राम और सीता माता का रखें। आप इस स्थान को पुष्प, दीप, धूप, नैवेद्य और अन्य पूजा सामग्री से सजा सकते हैं।
  3. प्रारंभिक पूजा: पूजा स्थान पर जाकर, श्री राम और सीता माता को अपनी श्रद्धा और समर्पण के साथ पूजें। आप उनके चरणों में फूल, अर्चना या धूप चढ़ा सकते हैं।
  4. सुंदरकांड का पाठ: सुंदरकांड का पाठ शुरू करने से पहले, आप ध्यान केंद्रित करें और मन को शुद्ध करें। फिर आप श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड की पुस्तक खोलें और प्रारम्भिक दोहे से पठन शुरू करें।
  5. नियमित पाठ: अपने ध्यान को संकेतित करते हुए, सुंदरकांड का नियमित पाठ करें। आप इसे दैनिक रूप से कर सकते हैं, या अपनी सुविधा के अनुसार दिन में एक या दो बार कर सकते हैं।
  6. समापन: सुंदरकांड के पाठ के बाद, श्री राम और सीता माता के चरणों में अपनी प्रार्थना करें और उनका आशीर्वाद लें।

घर में सुंदरकांड कराने से क्या होता है

यदि आप घर में सुंदरकांड का पाठ करवाते हैं, तो इससे निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं

  • मानसिक शांति: सुंदरकांड में भगवान हनुमान के उपास्य और अनुयायी होने का वर्णन है। इसका पाठ करने से मन को शांति मिलती है और आत्मिक आनंद का अनुभव होता है।
  • भक्ति और श्रद्धा का विकास: सुंदरकांड के पाठ के माध्यम से, आप भगवान हनुमान की भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि कर सकते हैं। यह आपके दिल को भक्ति और भगवान के प्रति प्रेम से पूर्ण करता है।
  • संकटों का निवारण: सुंदरकांड का पाठ करने से विभिन्न संकटों और मुसीबतों का निवारण हो सकता है। हनुमानजी को ब्रह्मचारी, बलवान और संकटमोचनकारी माना जाता है, इसलिए उनकी कृपा से सभी परेशानियों का समाधान हो सकता है।
  • सीता-राम प्रेम का विकास: सुंदरकांड में सीता-राम के प्रेम का वर्णन है, जिसे आप उनकी प्रेम कथा के माध्यम से जान सकते हैं। इससे आपका पार्टनरशिप और प्रेम संबंध मधुर और स्थिर हो सकता है।
  • संस्कृति का मार्गदर्शन: सुंदरकांड का पाठ करने से आप अपनी संस्कृति के महत्वपूर्ण हिस्से का अध्ययन करते हैं। इससे आप धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करने का संकेत मिलता है।

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सुंदरकांड भारतीय महाकाव्य रामायण का एक अध्याय है। यह रामायण का पांचवां अध्याय है और हिंदू धर्म में बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है।

वाल्मीकि ऋषि द्वारा लिखित रामायण में भगवान राम, भगवान विष्णु का एक अवतार, के जीवन और उनकी पत्नी सीता को रावण नामक राक्षस राजा से बचाने के लिए की गई कथा है। सुंदरकांड उन घटनाओं पर ध्यान केंद्रित करता है जब हनुमान, भगवान राम के भक्त, सीता की खोज के लिए समुद्र को पार करके लंका, रावण के राज्य में जाता है।

सुंदरकांड शब्द संस्कृत शब्दों “सुंदर” जो सुंदर अर्थ करता है और “कांड” जो अध्याय का अर्थ करता है से लिया गया है। इसका नाम इसलिए है क्योंकि इस खंड में वर्णित घटनाओं और छंदों की सुंदरता की वजह से है। सुंदरकांड कोविदित्से और भक्तिभरे गुणों के लिए जाना जाता है और इसे धार्मिक अवसरों पर अध्ययन, पाठ या गायन किया जाता है।

इस अध्याय में हनुमान की यात्रा लंका की ओर होती है, उसके विभिन्न पात्रों से मुलाकात होती है, सीता की खोज होती है और रावण और उसकी सेना के साथ उसके संवाद होते हैं। इसमें हनुमान की असाधारण ताकत, साहस और भगवान राम के प्रति भक्ति का वर्णन है। हनुमान अशोक वटिका में सीता को खोजता है, उसे राम की आगमन की आश्वासन देता है और उसका संदेश सीता को पहुंचाता है। उसके बाद हनुमान लंका में तांडव मचाता है, अपनी पूछ की मदद से शहर के हिस्सों को जला देता है और फिर भगवान राम के पास लौटता है और उन्हें अपनी जुटाई वाली जानकारी सुनाता है।

सुंदरकांड भगवान राम के भक्तों द्वारा अत्यंत पूज्य माना जाता है और इसके पाठ से आशीर्वाद, सुरक्षा और सफलता मिलने की आशा की जाती है। इसे धार्मिक आयोजनों के हिस्से के रूप में पढ़ा जाता है, खासकर हनुमान जयंती के नौ दिन के त्योहार के दौरान, जो भगवान हनुमान के जन्म के अवसर को मनाता है।

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Sunderkand is a chapter from the Indian epic, the Ramayana. It is one of the most popular and significant sections of the Ramayana and holds great religious and cultural importance in Hinduism.

The Ramayana, written by the sage Valmiki, narrates the life and adventures of Lord Rama, an incarnation of Lord Vishnu, and his quest to rescue his wife Sita from the demon king Ravana. Sunderkand is the fifth chapter of the Ramayana and focuses on the events that take place when Lord Hanuman, a devotee of Lord Rama, crosses the ocean to search for Sita in Lanka, Ravana’s kingdom.

The word “Sunderkand” is derived from the Sanskrit words “sundara” meaning beautiful and “kand” meaning chapter. It is named so because of the beauty of the events and the verses described in this section. Sunderkand is known for its poetic and devotional qualities and is often recited or sung in a melodic manner.

The chapter describes Hanuman’s journey to Lanka, his encounters with various characters, his search for Sita, and his interactions with Ravana and his army. It highlights Hanuman’s extraordinary strength, courage, and devotion to Lord Rama. Hanuman finds Sita in Ashoka Vatika, assures her of Rama’s arrival, and delivers Rama’s message to her. He then wreaks havoc in Lanka, burning parts of the city with his tail before returning to Lord Rama to convey the information he gathered.

Sunderkand is highly revered by devotees of Lord Rama, and its recitation is believed to bring blessings, protection, and success. It is often recited as part of religious ceremonies, especially during auspicious occasions or during the nine-day festival of Hanuman Jayanti, which celebrates the birth of Lord Hanuman.

The text of Sunderkand can be found in the original Valmiki Ramayana as well as in various translations and interpretations in different languages. Devotees often recite or listen to the verses of Sunderkand to seek spiritual solace, devotion, and inspiration from the heroic deeds of Hanuman and the message of Lord Rama’s righteousness.

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ସୁନ୍ଦରକାଣ୍ଡ

ତାରକବନ୍ଧନ ସ୍ତୋତ୍ର

ଶ୍ରୀଗୁରୁ ଚରନ ସରୋଜ ରଜ ନିଜ ମନ ମୁକୁର ସୁଧାରି । ବରନଉଂଚିତ ମନୋହର ବିମଲ ଯୋ ଜନୁ ଜ๾ଦ୍ୟନୁ କୁମୁଦ କେଲି ଚାରି ।।

ଯାନକୀଲାଳସୀ ଜୟ ଜୟେ ଜୟ ଜୟେକପୀଶାଚିତ ଶୋଭିତ ଭୂଷଣା। କୃପା ଦୃଷ୍ଟି କର ଅତ୍ୟଞ୍ଜଳି ବନ୍ଦନା।।

ହେମସୀନ୍ଧୁ ଭାଷିଣ୍ୟ ବିମଳ ଯଶୋଦାବନଧାମା। ପ୍ରିୟ ନଯେ ରଘୁବର ପଥମା।।

ଅରୁଣକେର ଧ୍ୟାନ ଜାସୁ ଜଲଧିମଗ୍ରା କୃଷ୍ଣକୁଶାସିନ୍ଧୁଜବି ଷାମି । ଗୋସ୍ତ୍ରୀ ତପାରହରଣ ଦ୍ଵାରପାଲାଙ୍କ ମହିମା ।।

ମନୁଜ ହରଣ୍ୟ କାରଣ ଗୁଣରୂପ ରାକ୍ଷସକୁଲାଙ୍କ ପ୍ରଣମନା । ଜୁଗୁପ୍ରପ୍ରମାଣ ପ୍ରଭୁ ଆପତିକୃପା ତୁମହାଙ୍କର ପାହିମା ।।

ଜନକସୁତ ବନ୍ଧୁ ସ୍ନେହ କାରଣ କୋଟିଭାନ୍ତ ପ୍ରଭୁ ଦର୍ଶନା। ଯାମୁନା ତୀର ବାଲୁକାଣ୍ଡ ବିମୋଚନା।।

ପୁଣ୍ଡ୍ରିକ ଭେଲା ମନୋହର ମୁଖ ହେମବିମାନେକେଲି ଚାରି। ହେମ ଶ୍ରୀପତି ହେମସୁତ ଭାଷିଣ୍ୟ ହେମ ଶ୍ରୀରାମ ମୋରି।।

ଯାନକୀ ମନ ପାଵନ ତୀର୍ଥ ଜାସୁ ବିହେମଦୀର୍ଘରେଖାଂକରୀ। ଜଗଜନନୀ ଜୟ ଜୟେ ଜୟ ଜୟେଜୟେକପୀଶାଚିତ ଭୂଷଣା।।

ତରକ ଭାନୁ ରୂପେ ଦେଖିଲାମ ପ୍ରଭୁ ତୁମରାମେଘ ଶୁଣିଲା। ତୁମ ମୋହନ ଦେହ ତଜି ଚିତ୍ତ ମଣି କହିଲା।।

ସରଦା ବହତୀ ସରିତାମୟୀ ଭିଷ୍ଟ ମୂଲିବହୁ ନୀଲାଞ୍ଚନ ଚାରି। ପ୍ରଗଟିଲା ଜନକସୁତ ତେଜ ସହିତ ଭାଷିଣ୍ୟ ବେଗାମ୍ୟାରି।।

ହେମରଞ୍ଜିତ ମେଘପରିମଳିତ ମୁଖ କେରୀତମେଘ ଦେଖା। ମାତା ଜନନୀ ଜୟ ଜୟେ ଜୟ ଜୟେପୂଜ୍ୟାଙ୍କ ଶିର ନନ୍ଦନା।।

ଜାନୁ ଜନୁ କପୀଶାଚିତ ଯଶୋଦାଜନନୀ ଦେଖିଲେ ରାମଚନ୍ଦ୍ରା। ଜନକସୁତ ରଘୁପତି ବନ୍ଧୁ ଭାଷିଣ୍ୟ ପଦାରାଧୀନ୍ନ୍ବୈରୀ।।

ମଣିମୁଦ୍ରିତ ଭୂଷଣ ରୂପେ ପ୍ରଭୁ ଜାନିଲେ ଦେଖିଲେ ମୋରାମେଘମାଳୀ। ପ୍ରାଣନାଥ ଜଯଜୟେକପୀଶାଚିତ ପ୍ରଭୁ ଭକ୍ତମଣ୍ଡଳୀ।।

ଆପଦ୍ଭୂମିମୂର୍ତି ପ୍ରଭୁ ଦର୍ଶନ ଜନକସୁତିନିଲୋଚନା। ପ୍ରାର୍ଥନାପୂଜାଦ୍ୟରୂପେ ଜୟଜୟେ ଜୟ ଜୟେପ୍ରଭୁଶଂଭୁଜିତା।।

ପରମେଶ୍ଵରପଦ ନୀଳେ ପ୍ରକାଶ ପ୍ରାଣରକ୍ଷାକାରୀ। ରାକ୍ଷସସେନା ହରିମୁଖ ଦେଖିଲେ ପ୍ରଭୁ ତୁମରାବତୀ କାରୀ।।

ଜନକସୁତ ବିଶ୍ଵବିଦାରେ ମମ ଦରଶନା ପାଇଁ ଆପରେ ଯାଚିଲା। ଶ୍ରୀହେମରଞ୍ଜିତ ମୁଖ ତୁମରାଚରଣରେ ପୂଜା କରିଲା।।

ଯାନୁ ପୁଣ୍ଡ୍ରିକ ପୂରନ୍ଦମା ମହିମା ତୁମରାଭିମାନେପ୍ରତ୍ୟରାଧାରୀ। ମନୋରାଜ୍ୟରୂପେ ପ୍ରଭୁତେଜସୁଦର୍ଶନ କରିଲା।।

ଯାମୁନାତୀରେ ଗୋଲୋଚନ ପ୍ରଭୁ ଗୋଚରଣାପାରିଜାନା। ତାପସପ୍ରାଣହରଣ ଦେଖିଲେ ଦୂରିଲେ ରାକ୍ଷସସେନା।।

କୃତାନ୍ତରଣା ପ୍ରଭୁ ଜାନକିଦେବୀ ହୃତ୍ୱିଷରୂପେଚାରି। ହନୁମାନଜାଞ୍ଜାରି ଶିରଶ୍ଛାଦିବରଣୀ ପ୍ରତ୍ୟରାଧାରୀ।।

ହେମାମଣିରୂପେମୁଖ ଭାଷିଣ୍ୟ ପଦାରାଧୀନ୍ନ୍ବୈରୀ। ହେମସୁନ୍ଦରୀତି ବୋଲିଛିଲୁଛି ହେମଶ୍ରୀରାମକେତୁ ପ୍ରିୟା।।

ହେମକୁଞ୍ଜଗାମୀ ଜନକସୁତ ହେମଶ୍ରୀରାମ ଜୟଜୟେ। ପୁଣ୍ଡ୍ରିକାକ୍ଷଗୋଚରଣ ପ୍ରକାଶିତ ହେମରଞ୍ଜିତଜୟେ।।

ଜନକସୁତ ହେମଶ୍ରୀରାମକେତୁ ପ୍ରିୟା। ଜଯଜୟେ ରାମଚନ୍ଦ୍ରା ହେମସୁନ୍ଦରୀମୁଖପ୍ରିୟା।।

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FAQ in Hindi

सुंदरकांड का पाठ कितने दिन करना चाहिए?

सुंदरकांड के पाठ के बारे में निश्चित समयावधि निर्धारित नहीं है। यह आपकी प्राथमिकताओं, समय और साधनों के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है। कुछ लोग इसे एक बार में पूरा करना पसंद करते हैं, जबकि अन्य लोग इसे अध्याय-अध्याय बांटकर रोजाना करते हैं।
आपके लिए सुंदरकांड का पाठ करने की संख्या और अवधि का निर्धारण आपकी आवश्यकताओं और समय के अनुसार होना चाहिए। यदि आपके पास प्रतिदिन काफी समय है और इच्छा है कि आप एक संपूर्ण सुंदरकांड का पाठ करें, तो आप इसे 7-10 दिन में पूरा कर सकते हैं।

सुंदरकांड पाठ कितने घंटे का होता है?

सुंदरकांड, वाल्मीकि रामायण का एक अध्याय है, जिसमें हनुमान जी लंका को ढूंढ़ने और सीता माता के पास पहुंचने की कथा का वर्णन होता है। यह रामायण का पाँचवां महाकाण्ड है और लगभग 2,500 श्लोकों से मिलकर बना हुआ है।
यदि श्लोकों की गिनती को एक घंटे में लगभग 150-200 श्लोक होते हैं, तो सुंदरकांड को पूरा करने के लिए आपको लगभग 12-15 घंटे की आवश्यकता हो सकती है।

सुंदरकांड शुरू करने से पहले क्या करना चाहिए?

सुंदरकांड पठने से पहले, आप अपने शरीर और मन को शुद्ध कर सकते हैं। यह आपको मेंटल और स्पिरिचुअल स्थिति में एकाग्रता प्रदान करेगा। इसके लिए आप ध्यान, प्रार्थना, योग या किसी अन्य शुद्धि पद्धति का उपयोग कर सकते हैं।

सुंदरकांडा कैसे सीखें?

पहले से ही रामायण की पूरी कथा और उसकी महत्वपूर्ण घटनाओं का अवधारण करें। सुंदरकांड रामायण के पठन में एक महत्वपूर्ण भाग है, इसलिए आपको इसे पढ़ने से पहले रामायण की पूरी कथा को समझना चाहिए।

हनुमान जी प्रसन्न होने पर क्या संकेत देते हैं?

हनुमान जी के प्रसन्न होने पर व्यक्ति में एक आशा और शांति की भावना उत्पन्न हो सकती है। यह व्यक्ति को आत्मिक सुख और समृद्धि का एक अनुभव करा सकता है।

सुंदरकांड कितने प्रकार के होते हैं?

सुंदरकांड केवल एक ही प्रकार का होता है। सुंदरकांड वाल्मीकि रामायण का पांचवां कांड है और इसमें हनुमान जी के उपाख्यान को विस्तार से बताया गया है। यह कांड श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा हनुमान जी के संदेश और मानसी वानर सेना के साथ लंका की खोज के बारे में बताता है। सुंदरकांड के वाणी में उपयोगिता और भक्ति की भावना उमड़ आती है और इसे अपनी जीवन में प्रयोग करने की प्रेरणा देता है। यह एक प्रमुख रामायणी कांड है और हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।